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आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में है कबà¥à¤œ दूर करने के बेहद आसान और कारगर उपाय, जानिठजरूरी बातें
कबà¥à¤œ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तब बनती है जब पाचन तंतà¥à¤° खराब हो जाता है.
खराब आहार, पानी कम पीना, बवासीर, पेट की कमजोर मांसपेशियां, तनाव, अनियमित शौच की आदत जैसे कà¥à¤› कारण हैं जिनकी वजह से कबà¥à¤œ की शिकायत होती है. कबà¥à¤œ यानी मलतà¥à¤¯à¤¾à¤— में परेशानी होना या इसका मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— सामानà¥à¤¯ से कम होना.
कबà¥à¤œ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ तब बनती है जब पाचन तंतà¥à¤° खराब हो जाता है. पाचन में गड़बड़ की वजह से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ जो à¤à¥€ खाना खाता है, उसे वह पचा नहीं पाता है. जिन लोगों के आहार में फाइबर की अचà¥à¤›à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ होती है, उनमें कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ का जोखिम कम रहता है. आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ ने इसे वात दोष का असंतà¥à¤²à¤¨ बताया है. वात दोष में असंतà¥à¤²à¤¨ की वजह से आंतों में विषाकà¥à¤¤ पदारà¥à¤¥ (अमा) और मल (पà¥à¤°à¤¿à¤·) जमने लगता है.
कà¥à¤› मामलों में कफ और पितà¥à¤¤ दोष के कारण à¤à¥€ कबà¥à¤œ की शिकायत हो सकती है. कबà¥à¤œ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठआयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में कà¥à¤› जड़ी-बूटियों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है. अमा यानी विषाकà¥à¤¤ पदारà¥à¤¥ के जमने पर कबà¥à¤œ में कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ दिखाई देते हैं जिसमें पेट दरà¥à¤¦, सिर में जलन, पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ लगना और बहती नाक शामिल है. वहीं पà¥à¤°à¤¿à¤· यानी मल जमने पर कबà¥à¤œ हो तो बेहोशी, पेशाब और मल ना आना, à¤à¤¡à¤¿à¤®à¤¾, तेज दरà¥à¤¦ की शिकायत हो सकती है. आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• इलाज के पहले यह जांच की जाती है कि कबà¥à¤œ की समसà¥à¤¯à¤¾ किस वजह से है.
ये चार हैं आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• उपचार
कबà¥à¤œ के आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• इलाज या उपचार में सà¥à¤¨à¥‡à¤¹à¤¨, सà¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¨, विरेचन और बसà¥à¤¤à¥€ शामिल हैं. सà¥à¤¨à¥‡à¤¹à¤¨ में जड़ी-बूटियों के तेल से शरीर की मालिश करते हैं. किस दोष के असंतà¥à¤²à¤¨ के कारण कबà¥à¤œ हà¥à¤† है इसी के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, जड़ी-बूटियों का चà¥à¤¨à¤¾à¤µ किया जाता है. अगर कबà¥à¤œ का कारण वात असंतà¥à¤²à¤¨ है तो हलà¥à¤•ी मालिश की जाती है. यदि पितà¥à¤¤ की वजह से कबà¥à¤œ हà¥à¤† है तो à¤à¤¸à¥‡ मालिश की जाती है कि उसका असर ऊतकों की गहराई तक हो सके. सà¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¨ में पसीना निकालने की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं को अपनाते हैं जिसमें सिकाई, गरà¥à¤® à¤à¤¾à¤ª देना या पूरी शरीर पर औषधीय गरà¥à¤® तेल को डालना शामिल है.
ये तरीका विषाकà¥à¤¤ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को उनकी जगह से हटाता है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तरल में बदल देता है. विरेचन पंचकरà¥à¤® की à¤à¤• तकनीक है जिसमें विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ जड़ी-बूटियों का उपयोग कर मल तà¥à¤¯à¤¾à¤— के जरिठशरीर की सफाई की जाती है. ये मल को बाहर निकालने और असंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ दोष को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ कर कबà¥à¤œ से राहत दिलाता है. बसà¥à¤¤à¥€ वासà¥à¤¤à¤µ में आयà¥à¤µà¥‡à¤°à¥à¤¦à¤¿à¤• à¤à¤¨à¤¿à¤®à¤¾ चिकितà¥à¤¸à¤¾ है. यह वात पà¥à¤°à¤•ृति वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के लिठबेहतरीन उपाय है. बसà¥à¤¤à¥€ में पूरी आंत, मलदà¥à¤µà¤¾à¤° और गà¥à¤¦à¤¾ को साफ करने का काम करती है.
ये जड़ी-बूटियां हैं काम की
कबà¥à¤œ की आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• जड़ी-बूटियों में हरीतकी, विà¤à¥€à¤¤à¤•ी और अरंडी शामिल हैं. ये पाचन तंतà¥à¤°, तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा, शà¥à¤µà¤¸à¤¨ और उतà¥à¤¸à¤°à¥à¤œà¤¨ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ पर कारà¥à¤¯ करती हैं. इनमें रेचक, रोगाणà¥à¤°à¥‹à¤§à¤•, कृमिनाशक, ऊरà¥à¤œà¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¤• और संकà¥à¤šà¤• गà¥à¤£ होते हैं.
ये हैं कबà¥à¤œ की औषधियां
कबà¥à¤œ के लिठआयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• औषधियों में दशमूल कà¥à¤µà¤¾à¤¥, तà¥à¤°à¤¿à¤«à¤²à¤¾, वैशà¥à¤µà¤¨à¤¾à¤° चूरà¥à¤£, हिंगॠतà¥à¤°à¤¿à¤—à¥à¤£à¤¾ तेल, अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ और इचà¥à¤›à¤¾à¤à¥‡à¤¦à¥€ रस शामिल हैं. वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की पà¥à¤°à¤•ृति और वजहों के आधार पर चिकितà¥à¤¸à¤¾ पदà¥à¤§à¤¤à¤¿ चà¥à¤¨à¥€ जाती है. उचित औषधि और रोग के निदान के लिठआयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• चिकितà¥à¤¸à¤• से परामरà¥à¤¶ करना चाहिà¤.
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